जानिए-इंसान की आत्मा का वजन कितना होता है?(aatma ka vajan kitna hota hai)

Insan ki aatma ka vajan kitna hota hai?(How Much Is The Weight Of Human Soul )

aatma ka vajan kitna hota hai- हां दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि इंसान की आत्मा का वजन कितना होता है और  यह प्राचीन मान्यता के अनुसार इंसान की आत्मा का वजन कैसे लिया गया था इस बारे में हम बात करेंगे.  यह एक शोध के रूप में आत्मा का वजन नापा गया है इस शोध के परिणाम के रूप आत्मा का वजन 21 ग्राम है जो कैसे नापा गया है वह नीचे इसके बारे में पूरी जानकारी दी गई है.

प्राचीन मान्यता के अनुसार (aatma ka vajan kitna hota hai)

एक मिस्त्र देश में प्राचीन मान्यता के अनुसार 1907 में जनरल ऑफ द अमेरिकन सोसायटी फॉर साइकिक रिसर्च’ मैं छापे गए एक आर्टिकल पर से मिला है जिसके अंदर ‘ हाइपोथेसिस ऑन द सब्सटेंस ऑफ द सोल अलांग विद एक्सपेरिमेंटल एविडेंस फॉदर एक्जिस्टेंट ऑफ रेड सब्जेक्ट’ इस नाम के आर्टिकल में व्यक्ति के मरने के बाद उनकी आत्मा के जुड़े हुए एक प्रयोग के बारे में बात की गई है.

आत्मा के वजन के बारे में प्रयोग

इस आर्टिकल में बताया गया है कि डॉक्टरों को लगता है कि आत्मा का भी एक निश्चित वजन है और एक डॉक्टर डंकन मैकडॉवेल जो एक फिजिशियन है उनके प्रयोग की चर्चा की गई है.
इनके प्रयोग के बारे में वह बताते हैं कि 1866 स्कॉटलैंड के ग्लासगो में डॉक्टर का जन्म हुआ था और 20 साल की उम्र में अमेरिका आ गए. उन्होंने hustan यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन मैं पिटाई की अरे चैरिटेबल हॉस्पिटल में लोगों का इलाज किया. अस्पताल के मालिक है जिनका कारोबार चीन के साथ हुआ करता था वह चीन से से कुछ चीजें लाया करते थे एक बार एक महत्वपूर्ण चीज लाए जो कि थी feyar beks का तराजू 1830 में बनाया गया था जिसमें बड़ी बड़ी चीजों का map और वजन आसानी से लिया जाता था.

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इस डॉक्टर उस हॉस्पिटल में काम करते थे वहां पर रोजाना वह लोगों को मरते हुए देखते थे तभी उनको ख्याल आया कि एक बार इंसान की आत्मा का वजन किया जाए. न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे गए लेख के हिसाब से यह घटना के 6 साल बाद शोध का विषय लोगों के सामने आया था. जिसमें था कि’ जब आत्मा शरीर से दूर हो जाती है तो शरीर में क्या बदलाव आता है?’

डॉक्टर डंकन का प्रयोग

यह  डॉक्टर ने इस तराजू पर एक प्रयोग किया था जिसमें एक frem को तराजू के फिट किया था उन्होंने तराजू इस तरह सेट किया था कि 28 ग्राम से भी कम बदलाव को नापा जा सकता है, फिर इस पर ऐसे लोगों को वजन किया जाता था कि जिनके बचने की संभावना ना हो और उनकी mरने की प्रक्रिया को बहुत ही करीब से देखा जाता था.
इन सभी शरीरों की वजन में हो रहे बदलाव को वह अपने नोट में लिखते थे इसमें वह सभी का हिसाब करते थे जैसे कि शरीर में पानी, खून पसीने, मल मूत्र, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन के बदलाव को भी देखते थे. उनके साथ उनके 4 साथी फिजिशियन यह काम कर रहे थे वह भी इन आंकड़ों का अलग-अलग हिसाब रख रहे थे.

य डॉक्टर डंकन का दावा (aatma ka vajan kitna hota hai)

ये डॉक्टर ने दावा किया कि’ जब इंसान अपनी आखिरी सांस लेता है तो इंसान के शरीर से आधा या सva onsh वजन कम हो जाता है. और जिस भी क्षण शरीर निष्क्रिय हो जाता है उस उस समय तराजू का स्केल तेजी से नीचे आ जाता है तभी ऐसा लगता है कि शरीर में से कुछ अचानक से निकल गया हो. ‘

डॉक्टर डंकन का 15 कुत्तों के साथ प्रयोग

यह प्रयोग डॉक्टर डॉक्टर ने 15 कुत्तों पर भी किया था जिसके अंदर उन्होंने कोई भी बदलाव नहीं देखा था बल्कि उन्होंने इस में नकारात्मक बदलाव देखा था यानी कि उनका स्केल तेजी से नीचे नहीं आया था जबकि इंसान का स्केल तेजी से नीचे आया था.
इस प्रयोग को उन्होंने इस तरह समझाया कि मौत के वक्त इंसान के शरीर के अंदर बहुत ही ज्यादा बदलाव आते हैं क्योंकि उनके शरीर में आत्मा होती है और कुत्तों के शरीर में बदलाव नहीं आता है इससे यह समझ आता है कि उनके शरीर में आत्मा होती नहीं.

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डॉक्टर के प्रयोग में कमियां-

यह साल तक चला था जिसमें बहुत सारी कमियां बताई गई है
इनके साथ काम करने को करने वाले साथी बता रहे हैं कि कई बार उनके तराजू ठीक तरह से एडजेस्ट नहीं हो, इस शोध का कई लोगों ने विरोध भी किया था, और वही दूसरे फिजिशियन यह बता रहे थे कि इसमें कई बार शरीर की मौत के बाद उससे पहले अचानक वजन कम हो जाता था और बाद में वापस बढ़ जाता था.

वैज्ञानिक रूप से वैज्ञानिकों ने इस शोध को परिणाम के नतीजों को मानने से इनकार कर दिया है और यह भी कहा है कि प्रयोग की वैधता को मानने से भी इंकार कर दिया है. लेकिन कई बार यह भी माना जाता है कि डंकन ने प्रयोग किए गए 6 आदमी पर उनके मौत से पहले हुए बदलाव को भी ध्यान में लिया है. इस शोध के अनुसार इंसान की आत्मा का वजन 21 ग्राम बताया गया है, यह डॉक्टर के प्रयोग के हिसाब से बताया गया है कि यह बदलाव शरीर के मौत के बाद आया था.


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